Friday, April 4, 2025

Martyr’s Day (Shahid Diwas) 2025 : ” है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं ” , भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु के बलिदान की अमर कहानी !

DIGITAL NEWS GURU NATIONAL DESK :- 

Martyr’s Day (Shahid Diwas) 2025 : ” है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं ” , भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु के बलिदान की अमर कहानी !

शहीद दिवस (Martyr’s Day) भारत में हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है, जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। ये तीनों वीर जवान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। ये तीनों वीर जवान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। भगत सिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उसका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है ।

इन तीनों वीरों ने अपने देश के लिए अपनी जान दी, जो हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को पंजाब के लायलपुर में हुआ था। वह एक महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी। सुखदेव और राजगुरु भी भगत सिंह के साथी थे जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी ।

इन तीनों वीरों को 23 मार्च, 1931 को फांसी पर लटका दिया गया था। उनकी मौत के पीछे की कहानी यह है कि उन्होंने लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी थी। इसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी ।

Martyr’s Day (Shahid Diwas)23 मार्च: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की याद में :

23 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। ये तीनों वीर जवान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और बाद में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी ¹।

शहीदों की जीवनी:

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को पंजाब के लायलपुर में हुआ था। वह एक महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी। सुखदेव और राजगुरु भी भगत सिंह के साथी थे जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी ।

शहीदों को फांसी देने के पीछे की कहानी:

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च, 1931 को फांसी पर लटका दिया गया था। उनकी मौत के पीछे की कहानी यह है कि उन्होंने लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी थी। इसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी ।

Martyr’s Day (Shahid Diwas) :शहीद दिवस का महत्व:

शहीद दिवस (Martyr’s Day) हमें उन शहीदों को याद करने का अवसर प्रदान करता है जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दी। यह दिन हमें अपने देश के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को बढ़ावा देने में मदद करता है। हमें अपने शहीदों की विरासत को याद रखना चाहिए और उनके बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए ¹।

अनसुनी कहानियां:

शहीद दिवस (Martyr’s Day) के पीछे की अनसुनी कहानियां बेहद रोमांचक और प्रेरणादायक हैं। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की कहानी हमें अपने देश के लिए लड़ने और अपने सिद्धांतों पर खड़े रहने की प्रेरणा देती है। महात्मा गांधी की कहानी हमें अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को अपनाने की प्रेरणा देती है ¹।

शहीद दिवस पर जनता के लिए संदेश:

हमारे शहीदों को नमन:

आज हम अपने देश के उन वीर जवानों को याद करते हैं जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दी। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अन्य कई शहीदों ने अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति दी।

उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प:

आज हम अपने शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। हम उनके सिद्धांतों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। हम अपने देश के लिए काम करेंगे और उसकी एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रयास करेंगे।

उनकी याद में कुछ करने का संकल्प:

आज हम अपने शहीदों की याद में कुछ करने का संकल्प लेते हैं। हम उनके नाम पर सामाजिक कार्य करेंगे, गरीबों और असहाय लोगों की मदद करेंगे और अपने देश के लिए कुछ करने का प्रयास करेंगे।

अंतिम शब्द:

आज हम अपने शहीदों को नमन करते हैं और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। हम उनके सिद्धांतों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे और अपने देश के लिए काम करेंगे।

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