Monday, July 27, 2026

CJP के हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद, मोदी सरकार के दौरान हुए प्रमुख आंदोलनों का निष्पक्ष विश्लेषण”

DIGITAL NEWS GURU NATIONAL DESK :-

CJP से पहले मोदी सरकार में हुए बड़े आंदोलन: किन प्रदर्शनों ने सरकार को फैसले बदलने पर मजबूर किया?

हाल ही में देशभर में चर्चा में रहे Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पिछले एक दशक में मोदी सरकार के दौरान कौन-कौन से बड़े जन आंदोलन हुए और उनका क्या असर पड़ा। परीक्षा पेपर लीक, बेरोज़गारी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।

हालांकि CJP आंदोलन पहला ऐसा विरोध नहीं है जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींचा हो। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई बड़े आंदोलन हुए, जिनका असर सरकार की नीतियों और राजनीतिक माहौल पर देखने को मिला।

1. किसान आंदोलन (2020–2021)

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा आंदोलन 2020 में शुरू हुआ किसान आंदोलन था। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक डटे रहे।

करीब एक वर्ष तक चले इस आंदोलन के दौरान कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। अंततः नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। इसे मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे बड़ा नीति परिवर्तन माना गया।

2. CAA–NRC विरोध प्रदर्शन (2019–2020)

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित होने के बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली के शाहीन बाग़ सहित कई शहरों में लंबे समय तक धरने चले।

सरकार का कहना था कि यह कानून पड़ोसी देशों के प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है, जबकि विरोध करने वाले समूहों का तर्क था कि इससे धार्मिक आधार पर भेदभाव की आशंका पैदा होती है। इस मुद्दे पर देशभर में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस हुई।

3. अग्निपथ योजना का विरोध (2022)

जून 2022 में केंद्र सरकार ने सेना भर्ती के लिए अग्निपथ योजना लागू की। इसके विरोध में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और कई अन्य राज्यों में युवाओं ने प्रदर्शन किए।

कई स्थानों पर हिंसा, आगजनी और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। सरकार ने योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक बताया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने नौकरी की अवधि और भविष्य को लेकर चिंता जताई।

4. महिला पहलवानों का आंदोलन (2023)

भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर देश के शीर्ष महिला और पुरुष पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया।

इस आंदोलन ने खेल जगत और राजनीति दोनों में व्यापक चर्चा पैदा की। खिलाड़ियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि सरकार ने जांच प्रक्रिया शुरू होने की बात कही। इस आंदोलन ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल संस्थाओं में जवाबदेही के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया।

5. मणिपुर हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन (2023)

 

मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद देश के कई हिस्सों में नागरिक संगठनों, छात्र समूहों और विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किए। संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई और सरकार से स्थिति सामान्य करने तथा राहत कार्य तेज करने की मांग उठी।

6. NEET और परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन

2024 से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों का असंतोष बढ़ता गया। 2026 में CJP के नेतृत्व में यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और छात्रों के लिए न्याय की मांग की।

आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की। सरकार ने परीक्षा सुरक्षा से जुड़े नए कानून और कड़े प्रावधान लाने की भी बात कही।

CJP आंदोलन क्यों बना अलग?

विश्लेषकों का मानना है कि CJP आंदोलन मुख्य रूप से युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर केंद्रित था। सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग और देशभर में मिले समर्थन ने इसे तेजी से राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन बना दिया। कई रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने आंदोलन के बाद कुछ प्रमुख मांगों पर कार्रवाई की और परीक्षा सुधार की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की।

आंदोलनों से क्या सीख मिलती है?

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों के विचार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं। वहीं सरकारों का तर्क होता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए जनता की चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। पिछले एक दशक के आंदोलनों से यह स्पष्ट होता है कि कृषि, नागरिकता, रोजगार, शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बड़े जन आंदोलन राष्ट्रीय नीति और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मोदी सरकार के दौरान हुए किसान आंदोलन, CAA विरोध, अग्निपथ प्रदर्शन, महिला पहलवानों के धरने और हालिया CJP छात्र आंदोलन जैसे कई आंदोलनों ने अलग-अलग मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाया। इनमें से कुछ मामलों में सरकार ने नीतियों में बदलाव या सुधारात्मक कदम उठाए, जबकि कुछ मुद्दों पर मतभेद और राजनीतिक बहस आज भी जारी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे आंदोलन सरकार, विपक्ष और नागरिक समाज के बीच संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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